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प्रेस विज्ञप्ति: न्याय की गुहार और भ्रष्टाचार का पर्दाफाश**

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शीर्षक: पीएमओ को गुमराह करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज; मानवाधिकार आयोग पहुँचा ‘श्री जी फार्म हाउस’ का जानलेवा अतिक्रमण मामला

हाथरस, उत्तर प्रदेश।
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता एसोसिएशन (पंजीकृत) ने ‘श्री जी फार्म हाउस’ के अवैध संचालन और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध अपनी लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर पर पहुँचा दिया है। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर हाथरस प्रशासन और विद्युत विभाग की ‘आपराधिक मिलीभगत’ की शिकायत दर्ज कराई है।

मानवाधिकार आयोग को दिए गए ज्ञापन के मुख्य बिंदु:

राजीव वार्ष्णेय ने आयोग को अवगत कराया कि यह मामला केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि अनुच्छेद-21 (जीवन का अधिकार) के खुले उल्लंघन का है।

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  • मौत का जाल: फार्म हाउस के मुख्य स्टेज के ऊपर से गुजर रही 33 KV हाईटेंशन लाइन किसी भी समय बड़े अग्निकांड या सामूहिक मौत का कारण बन सकती है।
  • अधिकारियों की चुप्पी: विगत 2 वर्षों से लिखित शिकायतों के बावजूद विद्युत विभाग (एक्सईएन शहर) और PWD अधिकारियों ने कोई धरातलीय कार्यवाही नहीं की, जो उनकी संलिप्तता को प्रमाणित करता है।

आयोग से की गई ‘संगीन’ मांगें:

एसोसिएशन ने मानवाधिकार आयोग के समक्ष निम्नलिखित स्पष्ट मांगें रखी हैं:

  1. स्वत: संज्ञान और FIR: आयोग इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेते हुए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दे।
  2. फार्म हाउस की सीलिंग: जन सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए श्री जी फार्म हाउस को तत्काल प्रभाव से सील/बंद करने हेतु जिला प्रशासन को आदेशित किया जाए।
  3. Action Taken Report (ATR): अधिकारियों से उनकी लापरवाही और विलम्ब पर जवाब तलब कर सख्त दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
  4. व्यक्तिगत जवाबदेही: यदि इस स्थल पर कोई अप्रिय घटना घटती है, तो संबंधित क्षेत्र के एक्सईएन (विद्युत) और फार्म हाउस स्वामी के विरुद्ध हत्या के प्रयास (BNS की धारा 109) के तहत कार्यवाही की जाए।

पीएमओ और शासन को दी गई चुनौती:

प्रेस नोट में उल्लेख किया गया कि PWD विभाग की रिपोर्ट (दिनांक 05-02-2024 व 26-02-2024) में 10 फुट के अवैध अतिक्रमण की पुष्टि और जिलाधिकारी (दिनांक 16-07-2024) द्वारा मजिस्ट्रेट व पुलिस बल की तैनाती के आदेश के बावजूद कार्यवाही का रुकना एक ‘बड़ा घोटाला’ है।

“प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘मामला निस्तारित’ होने की झूठी सूचना देना केंद्र सरकार के साथ धोखाधड़ी है। जब विभाग ने स्वयं माना है कि निर्माण अवैध है, तो बुलडोजर चलाने में किसका डर है? हम भ्रष्ट अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय होने तक चैन से नहीं बैठेंगे।”
— राजीव वार्ष्णेय (जिला अध्यक्ष)

दिनांक: 13-04-2026
स्थान: हाथरस
संपर्क: 8881525251

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