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श्री कृष्ण खेतान की अवैध कॉलोनी प्रकरण में जांच अधर में, समयसीमा बीती पर कार्रवाई शून्य?

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जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद उपजिलाधिकारी की ऐसी क्या मजबूरी, जांच अभी तक अधूरी ?

हाथरस। मेंडू रोड क्षेत्र में खसरा संख्या 56 पर नियम विरुद्ध विकसित की जा रही कथित श्री कृष्ण खेतान की अवैध कॉलोनी का मामला बीते कई महीनों से प्रशासनिक हलकों में लटकाने की वजह से चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रकरण में जिलाधिकारी स्तर से लगातार निर्देश जारी किए जाने के बावजूद उपजिलाधिकारी सदर कार्यालय स्तर पर जांच एवं आवश्यक कार्रवाई लंबित बनी हुई है, जो कहीं ना कहीं दूसरी ओर इशारा कर रही है? जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।प्राप्त अभिलेखों के अनुसार, इस संबंध में जिलाधिकारी हाथरस को राजस्व हानि की शिकायती पत्र प्रस्तुत किया गया । शिकायत में बिना स्वीकृत मानचित्र, बिना विकास अनुमति तथा आवश्यक शहरी सुविधाओं के कॉलोनी विकसित किए जाने की बात कही गई थी। साथ ही कुछ प्लॉटों की रजिस्ट्री ऐसे समय कराए जाने का उल्लेख था, जब कागजों में भूमि खाली दर्शाई गई, जबकि मौके पर निर्माण कार्य मौजूद बताया गया।शिकायत के संज्ञान में आने के बाद उपजिलाधिकारी सदर कार्यालय द्वारा 10 नवंबर 2025 को संबंधित विभागों को भौतिक निरीक्षण कर 12 नवंबर 2025 तक जांच आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए गए थे। पत्र में स्पष्ट किया गया था कि रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, निर्धारित समयसीमा बीतने के बावजूद जांच आख्या प्रस्तुत न होने से मामला लटका -अटका पड़ा है,रिकॉर्ड के अनुसार 6 नवंबर 2025, 20 नवंबर 2025 तथा 26 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी सदर को नियमानुसार कार्रवाई कर आख्या प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। इसके बावजूद शिकायत संख्या 20014425009503 (विभाग – राजस्व एवं आपदा) दिनांक 8 जनवरी 2026 तक लंबित दर्शाई जा रही है।अंतिम आदेश में 25 जनवरी 2026 की समयसीमा भी निर्धारित की गई, लेकिन फाइल अब भी कार्यालय स्तर पर लंबित बताई जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, एक चरण पर प्रस्तुत की गई आख्या को अस्वीकृत कर पुनः जांच के निर्देश दिए गए थे, किंतु उसके बाद भी स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आ सका। वहीं, कथित कॉलोनी विकासकर्ता को नोटिस जारी किए जाने की पुष्टि तो मिलती है, परंतु निर्माण रोकने, सीलिंग अथवा अन्य ठोस विधिक कार्रवाई के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समयबद्ध कार्रवाई न होने से प्लॉट खरीद चुके लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वहीं, संभावित खरीदार भी अनिश्चितता में हैं।प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जब जिलाधिकारी स्तर से बार-बार निर्देश जारी हों और फिर भी निचले स्तर पर कार्रवाई आगे न बढ़े, तो यह स्थिति समीक्षा और जवाबदेही की मांग करती है।
अब जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि निर्धारित अगली समयसीमा तक उपजिलाधिकारी सदर कार्यालय द्वारा जांच आख्या प्रस्तुत की जाती है या नहीं, तथा क्या जिलाधिकारी के आदेशों के अनुरूप इस प्रकरण में कोई ठोस कार्रवाई सामने आती है। मेंढू रोड की कथित अवैध कॉलोनी का यह मामला अब केवल भूमि विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक आदेशों के अनुपालन और जवाबदेही से जुड़ा विषय बनता जा रहा है।

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