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Hathras; कोठी के चक्कर में नाली मोड़ने का आरोप, सड़क पर उतरे लोग; विधायक के खिलाफ गूंजी नारेबाजी सदर विधायक पर सत्ता के दुरुपयोग के आरोप, महिलाओं ने सड़क पर बैठकर किया प्रदर्शन; ईओ की गाड़ी के आगे बैठीं, मौके पर पहुंची पुलिस

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up/ Hathras नगर पालिका ईओ की गाड़ी के आगे बैठी मातृशक्ति मौके पर मौजूद पुलिस बल हाथरस। जब किसी पर सत्ता का नशा हावी होता है तो आरोप है कि वह सही-गलत का फैसला करने के बजाय वही करता है, जिसमें उसे अपना लाभ नजर आए। फिर चाहे उसके फैसले का खामियाजा उसे वोट देने वाली जनता को ही क्यों न भुगतना पड़े। हाथरस में सत्तारूढ़ भाजपा की सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर के खिलाफ आज अलीगढ़ रोड स्थित भारतीय जीवन बीमा निगम की बिल्डिंग के पास वाली गली में हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन ने कम से कम यही सवाल खड़ा कर दिया।स्थानीय लोगों ने विधायक पर सत्ता के प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए अपनी कोठी के सामने सड़क और नाली के निर्माण में मनमानी कराने का आरोप लगाया। देखते ही देखते विरोध ने उग्र रूप ले लिया और बड़ी संख्या में महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। प्रदर्शनकारियों ने विधायक के खिलाफ “दादागिरी नहीं चलेगी-नहीं चलेगी” और “भाजपा मुर्दाबाद” जैसे नारे लगाए। महिलाओं के सड़क पर बैठने से यातायात बाधित हो गया और कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई।क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि इसी गली में सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर की कोठी है। लोगों के मुताबिक विधायक द्वारा हाल ही में अपनी कोठी का निर्माण कराया गया है और इसके लिए पुरानी सड़क को उखड़वाकर दोबारा निर्माण कराया गया। आरोप यह भी है कि कोठी के सामने आने वाली नाली को रोककर उसका रास्ता मोड़ दिया गया, ताकि विधायक के आवास के सामने जलनिकासी से जुड़ी कोई परेशानी न हो।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कथित तौर पर नाली का रास्ता बदलने से अब आसपास के मकानों के सामने गंदा पानी पहुंच रहा है और यदि व्यवस्था इसी तरह रही तो बरसात में जलभराव की समस्या और विकराल हो सकती है। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या जनप्रतिनिधि के घर के सामने की सुविधा के लिए पूरी गली के लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी?हंगामे की सूचना पर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को घेर लिया और अपनी समस्या बताने का प्रयास किया। इसी दौरान कई महिलाएं नगर पालिका के ईओ की गाड़ी के आगे बैठ गईं। महिलाओं का आरोप था कि ईओ गाड़ी से उतरकर उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं।मौके की स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने भी स्पष्ट किया कि मामला नगर पालिका से संबंधित है और समस्या का समाधान अधिकारियों के स्तर से ही हो सकता है। स्थिति बिगड़ती देख कुछ पुलिसकर्मी मौके से वापस जाने लगे, लेकिन लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ।आखिरकार अधिशासी अधिकारी ने मौके पर चल रहे नाली निर्माण कार्य को तत्काल रुकवा दिया। इतना ही नहीं, नाली को दिए जा रहे कथित मोड़ को भी भरवा दिया गया। इसके बाद भी लोगों का आक्रोश शांत नहीं हुआ और विधायक के खिलाफ नारेबाजी जारी रही।विरोध प्रदर्शन के दौरान सदर विधायक अंजुला सिंह माहौर की कोठी के बाहर भी लोगों की भीड़ जुट गई। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन के समय विधायक मौके पर मौजूद नहीं थीं।स्थानीय लोगों का कहना था कि सड़क और नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी एक व्यक्ति की सुविधा के हिसाब से तय नहीं होनी चाहिए। लोगों ने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर ऐसी जलनिकासी व्यवस्था बनाई जाए जिससे किसी एक मकान को लाभ पहुंचाने के बजाय पूरी गली के लोगों को राहत मिले।इस पूरे घटनाक्रम ने जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सत्ता और पद के प्रभाव में यदि विकास कार्य भी व्यक्तिगत सुविधा के हिसाब से होने लगें तो आम जनता आखिर अपनी शिकायत लेकर कहां जाए?आज सड़क पर उतरे लोगों के तेवर बता रहे थे कि स्थानीय विवाद अब केवल सड़क और नाली तक सीमित नहीं रह गया है। लोगों के भीतर नाराजगी इतनी बढ़ी कि उन्हें विधायक के खिलाफ खुलकर नारे लगाने पड़े। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है?

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