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टी०बी० मुक्त प्रदेश बनाने हेतु अस्पतालों पर निःशुल्क, जाँच, इलाज, निक्षय पोषण योजना व परामर्श की मिल रही है सुविधा

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लखनऊ:
क्षय रोग एक जानलेवा बीमारी है, जिसके कारण लाखों लोगों को प्रतिवर्ष जान गंवानी पड़ती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 2030 तक विश्व से क्षय उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है। भारत के मा0 प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए देश से क्षय रोग को उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए संचालित प्रधानमंत्री टी०बी० मुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश की समस्त स्वास्थ्य इकाइयों पर 15 दिसंबर, 2022 को पहला निक्षय दिवस मनाया गया। टी०बी० मरीजों की शीघ्र पहचान, गुणवत्तापूर्ण इलाज और निक्षय पोषण योजना का लाभ दिलाने के उद्देश्य से इसकी शुरुआत की गई है।
प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर 15 दिसंबर, 2022 को मनाये गए पहले निःक्षय दिवस पर ओपीडी में आये लगभग 2,80,176 मरीजों में से लगभग 31,696 संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग की गयी। इनमें से 21,680 सैम्पल लिए गए, जिनमें से 14,802 सैम्पल की जांच रिपोर्ट में 608 लोगों में क्षय रोग की पुष्टि हुयी थी। इसके बाद से प्रदेश में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम का प्रदेश में सफलतापूर्वक क्रियान्यन किया जा रहा है। प्रदेश में प्रत्येक माह की 15 तारीख को टीबी, कालाजार, फाइलेरिया, कुष्ठ रोग के लिए एकीकृत निःक्षय दिवस मनाया जा रहा है, जिसमें मरीजों की जाँच की जा रही है।
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रदेश में प्रयोगशाला जांच नेटवर्क में 2017 के सापेक्ष 2025 में सुधार हुआ है और नेटवर्क 141 से बढ़कर 930, कल्चर 5 से बढ़कर 141 हो गया है। प्रदेश में 8 नए टीबी कल्चर लैब्स की स्थापना की गई है। वर्तमान में प्रदेश में 14 टीबी कल्चर लैब क्रियाशील है। जिनमें मरीजों के बलगम आदि की जाँच की जा रही है।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत रोगियों को प्रतिमाह दी जाने वाली धनराशि में दिनांक 01 नवंबर, 2024 से रु0 500 प्रतिमाह की वृद्धि कर दी है। क्षय रोगियों के खातों में सीधे धनराशि भेजी जा रही है। प्रदेश में 2015 के सापेक्ष टीबी मृत्यु दर में 90 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। प्रदेश में 2018 से 2025 तक क्षय रोगियों के खातों में रू0 1,022 करोड़ की धनराशि पोषण हेतु स्थानांतरित की गई है। प्रदेश में 2022 से 2025 तक 95,000 निक्षय मित्रों द्वारा पोषण तथा सामाजिक सहायता क्षय रोगियों को दी गई है। वर्तमान तक लगभग 9.69 लाख पोषण पोटली रोगियों को दी जा चुकी।
प्रदेश की आशा कार्यकर्त्रियाँ दो सप्ताह या अधिक समय से खांसी वाले, दो सप्ताह या अधिक समय से बुखार वाले, वजन में कमी वाले भूख न लगने और बलगम से खून आने वाले संभावित टी०बी० मरीजों की सूची तैयार कर उन्हें हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर तक लाने का कार्य कर रही है। कम्युनिटी हेल्थ आफिसर (सी०एच०ओ०) द्वारा मरीजों की प्रारम्भिक जांच एच०आई०वी०, डायबिटीज और अन्य जांच सुनिश्चित की जाती है। इसके अलावा बलगम का नमूना लेकर उसे निक्षय पोर्टल पर प्रिजमटि व आई०डी० बनाते हुए नजदीकी टी०बी० जांच केंद्र पर भेजते हुए उनका इलाज किया जा रहा है।

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निक्षय दिवस पर स्वास्थ्य इकाई पर आने वाले संभावित टी०बी० मरीजों की सूची के अनुसार उनकी जांच करायी जाती है। एच०आई०वी० डायबिटीज की भी जाँच करायी जा रही है। स्वास्थ्य इकाइयों पर सम्भावित मरीजों के बैठने की खुली जगह की व्यवस्था और इकाई के बाहर खुले स्थान पर बलगम के नमूने लेने के लिए कफ कार्नर बनाया गया है। क्षय रोगियों के लिए हर जरूरी दवाएं भी स्वास्थ्य इकाइयों पर उपलब्धता और प्रत्येक स्वास्थ्य इकाई पर टी०बी० की जाँच, उपचार के बारे में परामर्श की भी व्यवस्था की गई है।

के0एल0 चौधरी, से0नि0 उपनिदेशक, सूचना

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