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कुट्टू-सिंघाड़े के दाम गिरे, फलों के उछले, बाजार में उपवास के लिए खाद्य सामग्री की बढ़ी बिक्री

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हाथरस। साबूदाना, मूंगफली, मखाना व सेंधा नमक व अन्य सामग्री की भी अच्छी-खासी बिक्री हो रही है। हालांकि फलों के दामों में लगातार बढ़ोतरी से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महाशिवरात्रि के मौके पर बाजारों में उपवास में प्रयोग होने वाली खाद्य सामग्री की मांग बढ़ गई है। इस बीच कुट्टू और सिंघाड़े के आटे के दामों में कमी आने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है, लेकिन फलों की कीमतों में आए उछाल ने लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया है। व्यापारियों ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार कुट्टू के आटे के दामों में करीब 10 रुपये प्रति किलो और सिंघाड़े के आटे के दामों में लगभग 40 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। पिछले साल तक 139 रुपये किलो तक बिकने वाला कुट्टू का आटा इस साल 120 रुपये व पिछले साल 240 रुपये किलो बिकने वाला सिंघाड़े का आटा इस साल 200 रुपये किलो बिक रहा है। साबूदाना, मूंगफली, मखाना व सेंधा नमक व अन्य सामग्री की भी अच्छी-खासी बिक्री हो रही है। हालांकि फलों के दामों में लगातार बढ़ोतरी से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बाजार में केला, सेब, अंगूर, संतरा और बेर समेत अधिकांश फलों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

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दुकानदारों का कहना

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हाथरस। दुकानदारों का कहना है कि आवक कम होने और मांग बढ़ने से फलों के दामों में तेजी आई है। ग्राहकों का कहना है कि व्रत के दौरान फलों की जरूरत अधिक होती है, लेकिन महंगाई के चलते खरीदारी सीमित करनी पड़ रही है। वहीं व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में आवक बढ़ने पर फलों के दामों में कुछ राहत मिल सकती है।

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महाशिवरात्रि पर ये रहे फलों के दाम

फल -पहले के दाम -अब
केला -30 रुपये किलो -45 रुपये किलो
सेब -180 रुपये किलो -220 रुपये किलो
अंगूर -120 रुपये किलो -160 रुपये किलो
बेर -50 रुपये किलो -60 रुपये किलो
संतरा -50 रुपये किलो -70 रुपये किलो
पपीता -40 रुपये किलो -50 रुपये किलो

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डॉक्टर का कहना

हाथरस। कुट्टू के आटे के संबंध में डाॅ. वरुण चौधरी ने बताया कि कुट्टू के आटे का प्रयोग कभी भी घातक साबित हो सकता है। कुट्टू को आटे में तब्दील होने के बाद अधिकतम 24 घंटे के बाद प्रयोग किया जाना घातक साबित हो सकता है।

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रखे हुए कुट्टू के आटे से होने वाले नुकसान

हाथरस। फंगल इन्फेक्शन कुट्टू का आटा नमी के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। लंबे समय तक रखने पर इसमें बहुत जल्दी फंगस लग जाती है, जो जहरीले तत्वों को पैदा कर सकती है।

फूड पॉइजनिंग : पुराना या खराब कुट्टू का आटा खाने से उल्टी, दस्त, पेट में तेज दर्द और घबराहट जैसी गंभीर फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है।

त्वचा की एलर्जी : खराब आटे के सेवन से शरीर पर चकत्ते, खुजली या सूजन जैसी एलर्जी की प्रतिक्रियाएं भी देखी जाती हैं।

आहार का ऑक्सीडेशन : कुट्टू में वसा की मात्रा अधिक होती है, जो हवा के संपर्क में रहकर रैंसिड हो जाती है, जिससे आटे का स्वाद कड़वा हो जाता है और यह पाचन तंत्र को बिगाड़ सकता है।

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कैसे पहचानें खराब आटा

रंग में बदलाव : ताज़ा कुट्टू का आटा हल्का भूरा या मटमैला होता है। यदि यह बहुत काला दिखने लगे, तो इसे उपयोग न करें।
गंध : खराब आटे में से एक अजीब सी दुर्गंध या सीलन की महक आने लगती है।

कड़वाहट : यदि आटे की बनी पूड़ी या पकोड़े कड़वे लग रहे हों, तो वह आटा सेहत के लिए हानिकारक है।

विशेष सुझाव : उपवास के समय अक्सर लोग पुराना रखा आटा इस्तेमाल करते हैं। हमेशा नया और सीलबंद पैकेट ही खरीदें और उसे एयरटाइट डिब्बे में रखें।

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